शनिवार, 6 सितंबर 2008

मॉरिशस के स्मृति चिन्ह

मेरे एक मित्र ने कहा-
मॉरिशस से आया है
कुछ बोतल-वोतल लाया?

मैंने कहा- जो लाया हूँ
वह बोतल में आ नहीं सकता
किसी उपहार के आवरण में
समा नहीं सकता

उसने उत्सुकता से पूछा-
ऐसा क्या लाया है?

मैंने कहा- जो लाया हूँ
उसकी मन्दिर में पूजा,
मस्जिद में इबादत और
गिरिजाघर में प्राथना हो सकती है

उसने फ़िर पूछा-
ऐसा क्या लाया है?

मैंने उत्तर दिया-
मैं उन गन्ने के खेतों में
ढेर लगे पत्थरों से
एक पत्थर# चुराकर लाया हूँ
जो
वहां के इतिहास का
गौरव है
और
वर्तमान का साक्षी।
# भारतीय (गिरमिटिया) मजदूरों ने इन पत्थरों को खोद-खोदकर खेतों को उपजाऊ बनाया था। उनके श्रम के सम्मान व स्मृति में इन्हें खेतों में ढेर लगाकर सुरक्षित रखा गया है।